लश्का कमर बांधा,
हिम्मत का साथा फिर भुला उज्याली होली,
कां लै रौली राता?लश्का कमर बांधा.....
य नि हूनो, ऊ नि होनो,कै बै के नि हूंनो,
माछी मन म डर नि हुनि चौमासै हिलै के
कै निबडैनि बाता धर बै हाथ म हाथा,
सीर पाणिक वै फुटैली जां मारुलो लातालश्का कमर.....
जब झड़नी पाता डाई हैं छ उदासा,
एक ऋतु बसंत ऐछ़ पतझडा़ का बादलश्का कमर बांधा...
Wednesday, December 30, 2009
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badiya rachnyne..
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