लश्का कमर बांधा,
हिम्मत का साथा फिर भुला उज्याली होली,
कां लै रौली राता?लश्का कमर बांधा.....
य नि हूनो, ऊ नि होनो,कै बै के नि हूंनो,
माछी मन म डर नि हुनि चौमासै हिलै के
कै निबडैनि बाता धर बै हाथ म हाथा,
सीर पाणिक वै फुटैली जां मारुलो लातालश्का कमर.....
जब झड़नी पाता डाई हैं छ उदासा,
एक ऋतु बसंत ऐछ़ पतझडा़ का बादलश्का कमर बांधा...
Wednesday, December 30, 2009
सुरा- शराबैल ,
सुरा- शराबैल ,
सुरा- शराबैल हाय मेरी मौ , लाल कै दी हो,
छन दबलौं ठन ठन गोपाल कै दी हो,
न पये न पये कोओय सबुले , कैकी नि मानी ,
साँची लगौनी अकला- उम्र दघोडी नि आनी,
अफ्फी मैले अफ्फु हैणी जंजाल कै दी हो,
छन दबलौं ठन ठन गोपाल कै दी हो
सुरा- शराबैल हाय मेरी मौ , लाल कै दी हो,
छन दबलौं ठन ठन गोपाल कै दी हो,
न पये न पये कोओय सबुले , कैकी नि मानी ,
साँची लगौनी अकला- उम्र दघोडी नि आनी,
अफ्फी मैले अफ्फु हैणी जंजाल कै दी हो,
छन दबलौं ठन ठन गोपाल कै दी हो
हीरा सिंह राणा - उनकी कुछ कवितायेँ

आदरणीय सदस्यगण,
मैं आपको राणा जी की कविताओं की कुछ पंक्तियाँ बताना चाहूँगा,और आशा करता हूँ की आप उनकी कविताओं को समझने की कोशिश करेंगे.
एक परिचय,
नाम ; हीरा सिंह राणा
गाओं : डधोई, मानिला,
पढ़ाई ; माध्यमिक स्चूल तक
जन्म ; १६ सितम्बर १९४२.
शौक : गीत लिखना और गीत गाना ,
आज तक प्रकाशित पुस्तकों के नाम
1. प्योली और बुरांश
1. प्योली और बुरांश
२. मनिले डानी
3. मन्ख्यो पड्योव मैं ,
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